अभिनन्दन

पहले जिन्होंने कभी हमारा अभिनन्दन ना किया,
देखो आज हमारे डर से अभिनन्दन को छोड़ दिया

इतनी जल्दी जो समझौता कभी ना करते थे,
और आग बबूला होकर ही जो रखते शर्तें थे,
उन्होंने कैसे शांति वाला पल्लू ओढ़ लिया,
पहले जिन्होंने कभी हमारा अभिनन्दन ना किया,
देखो आज हमारे डर से अभिनन्दन को छोड़ दिया

सबके पीछे छिपा हुआ कोई राज़ हो सकता है,
या फिर पाकिस्तान का कोई श्रीयंतर लगता है,
क्यों पलटवार बदला लेना मनसूबा तोड़ दिया ,
पहले जिन्होंने कभी हमारा अभिनन्दन ना किया,
देखो आज हमारे डर से अभिनन्दन को छोड़ दिया

मौत को जेब में रखकर डाली थी ख़तरे में जान,
फिर ख़तरे को ज़िंदा कर मार लौटा वीर जवान,
उसके सामने दुश्मन लगते थे कद्दू और घीआ,
पहले जिन्होंने कभी हमारा अभिनन्दन ना किया,
देखो आज हमारे डर से अभिनन्दन को छोड़ दिया

अब यशु जान पे लोग नज़रें रखें हैं लाखों भर ,
सब पढ़ने वालों गौर ज़रूरी करना बातों पर,
जो मज़लूमों को मारता था क्यों बन बैठा है पीया,
पहले जिन्होंने कभी हमारा अभिनन्दन ना किया,
देखो आज हमारे डर से अभिनन्दन को छोड़ दिया
-यशु जान,  78143-94915

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