लम्हा वो ज़िंदगी का

लम्हा वो ज़िंदगी का भुलाना मुश्किल होता है ,
जब ये दिल किसी की सूरत का आशिक होता है ,
लम्हा वो ज़िंदगी का भुलाना मुश्किल होता है ,

हक़ीक़त भूल जाते हैं दिलों में डूबने वाले ,
जो कोई अनजाना आकर हमसे वाक़िफ़ होता है ,
जब ये दिल ………………………………

भूल जाते हैं सब रिश्ते सिर्फ़ उन्हें छोड़कर ,
याद रखना उन्हीं को फिर मुनासिब होता है ,
जब ये दिल ………………………………

ज़ेहन में है यही आता नाम क़ातिल रख दें उनका ,
हमें वो मारकर ज़िंदा ना ख़ुद ही क़ातिल होता है ,
जब ये दिल ………………………………

वो फ़िर ख़ुश ना होते हैं ‘यशु’ की जान को लेकर ,
मुनाफ़ा इस तरह का आशिक़ों को हासिल होता है ,
जब ये दिल ………………………………
-यशु जान, संपर्क : 78143-94915

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